Shri Krishna
मिंदर री खिड़की
Mindar Ri Khidki
Meera
Shri Krishna
मीरा बाई और राणा के प्रसंग पर आधारित पारंपरिक लोक भजन।
अरे मिंदर री खिड़की तू तो खोल मीरा बाई,
मिंदर री खिड़की तू तो खोली राणो आयो।
हे दर्शन करी वाहो जी,
अरे मिंदर री खिड़की तू तो खोल मीरा बाई।
नहीं है नुगरा रो अठे काम राणा,
नुगरा बिन खाने दर्शन को नहीं मिले हो जी,
अरे नहीं है नुगरा रो अठे काम।
किन तो धरिया है माथे हाथ मीरा भाई,
किनरा कंठी डोरा बांध दिया हो जी।
रविदास धरिया माथे हाथ राणा,
डोरा कंठी तो वे तो बांया हो जी।
ओछी है चमारा वाली जात मीरा भाई,
मुआ रोरा काटे चाड़ा हो जी।
कोनी मारे ऊंच नीच रो काम राणा,
बना देखने गुरसा कर दिया हो जी।
अरे ननी थकी ने भजि राम मीरा भाई,
थोडो पर चोरे माने बतावा हो जी।
अरे छोटी उम्र में भजिया श्याम मीरा भाई,
थोडो रामयन हेलो मार लो जी।
यह भजन पारंपरिक/सार्वजनिक डोमेन रचना है।