Shri Ram
हंसा सुन्दर काया रो मत करजे अभिमान
Hansa Sundar Kaya Ro
Rajasthani Bhajan
Shri Ram
यह पारंपरिक राजस्थानी निर्गुण भजन जीवन की नश्वरता और अहंकार से दूर रहने की सीख देता है।
हंसा सुन्दर काया रो मत करजे अभिमान रे,
आखिर एक दिन सांवरे माजधार।
हंसा सुन्दर काया रो मत करजे अभिमान,
आखिर एक दिन सांवरे, मालिक तेरे घर जाना।
पलभर झूठा है, पलभर में सब कुछ छूट जाना है,
हंसा सुंदर काया रो मत करजे अभिमान।
गर्भवास में आयने, तू तो भूल गयो है भाई,
पल भर को तू मुनि, पल भर को तू राजा रे।
पल भर में सब छूट जाना, हंसा सुन्दर काया रो,
मत करजे अभिमान, आखिर एक दिन सांवरे।
तीरथ व्रत तू कर ले, नर तन नहीं पावे रे,
फिर पछतावे जियरो, हाथ कुछ नहीं आवे रे।
खेलो रे संग में, खेलो रे मोहन से,
हंसा सुन्दर काया रो मत करजे अभिमान।
राम नाम रो बांध ले, भव से पार जावेगा,
सुरतिया तेरी कहते, सतगुरु पार लगावेगा।
हंसा सुन्दर काया रो मत करजे अभिमान।
यह भजन पारंपरिक/सार्वजनिक डोमेन रचना है।