Shri Ram
थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी
Thari Kaya Ro Gulabi Rang
Rajasthani Bhajan
Shri Ram
जीवन की क्षणभंगुरता पर आधारित पारंपरिक राजस्थानी निर्गुण भजन।
थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी,
उड़ जासी रे पंछी, उड़ जासी।
उजाला सिर को पर जासी,
थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी।
हरा-हरा रूखड़ा, फल लागे रे घणा,
एक दिन झड़ जासी, फूल पड़ जासी मान।
थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी।
सूरज उगे, दिन ढल जावे रे,
तख्तियां सब पड़ जावे, खेल खतम हो जासी।
थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी।
रैन बसेरा पंछी, भोर भई रे उड़ जासी,
खेले खेल खतम हो जावे, माया सब छूट जासी।
थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी।
यह भजन पारंपरिक/सार्वजनिक डोमेन रचना है।