Shri Ram
मनवा निठारी
Manva Nithari
Rajasthani Bhajan
Shri Ram
माया और मोह में उलझे मन को सचेत करने वाला पारंपरिक भजन।
मनवा निठारी, नहीं विचारी रे,
थारी-मारी करता, उमर बीत जासी।
नव दस मास गर्भ में माता, मनवा निठारी, माता थारी रे।
बालपन में लाड लडाया, माता थारी रे,
बड़ा भयो तो माया लागे, थारी रे।
थारी-मारी करता, उमर बीत जासी।
माया-माया करता, खर्चो फिरो,
थोड़ी-थोड़ी माया, सब छूट जासी।
थारी-मारी करता, उमर बीत जासी।
गुरु मिलिया, सतगुरु मिलिया, सांवरिया ने भज ले, मनवा थारी रे।
थारी-मारी करता, उमर बीत जासी।
यह भजन पारंपरिक/सार्वजनिक डोमेन रचना है।