Shri Ram
संसार वीरा
Sansar Veera
Rajasthani Bhajan
Shri Ram
संसार की नश्वरता और महापुरुषों के दृष्टांतों पर आधारित पारंपरिक भजन।
संसार वीरा, घड़ी पलक रो मेलो वो,
हेडो रे अव सरयो पाछो नहीं रे मिले।
पांडव सरी का राजवी आया जुग रे माई,
भीम सरी को योद्धा नहीं रे मिले।
ओ तो संसार वीरा, घड़ी पलक रो मेलो वो।
हरिश्चंद्र जेड़ा दानी आया चुग रे माई,
तारा मती जैसी रानी नहीं रे मिले।
ओ तो संसार वीरा, घड़ी पलक रो मेलो वो।
राम सरी का राज भी आया जुग रे माई,
लक्ष्मण सरी को भाई नहीं रे मिले।
ओ तो संसार वीरा, घड़ी पलक रो मेलो वो।
मात पिता री कावड़ लेने तीर्थ करवा चाले,
श्रवण सरी को बेटो नहीं रे मिले।
ओ तो संसार वीरा, घड़ी पलक रो मेलो वो।
हाथ जोड़ने तो मीरा बाई बोले,
संतो रो संगो बीरा नहीं रे मिले।
ओ तो संसार वीरा, घड़ी पलक रो मेलो वो।
यह भजन पारंपरिक/सार्वजनिक डोमेन रचना है।